ईरान-यूएस डील की पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने एक बार अपनी जमीन पर वार्ता की मेजबानी की. लेकिन इससे निकला परिणाम पूरी तरह सतही था. इसके बाद पाकिस्तान सिर्फ चिट्ठियों को ले जाने और ले आने का काम करता रहा. शर्तें तय कराने में उसकी कोई भूमिका नहीं रही.
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