तिब्बती परंपरा, जो बौद्ध धर्म से भी प्राचीन है, वह ऐसा मानती है कि हर एक व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र की एक "जीवात्मा" होती है, जिसे "ला" कहा जाता है. यह "ला" प्राकृतिक तत्वों जैसे पर्वतों, सरोवरों, पेड़ों आदि में निवास करती है. अगर इस "ला" के निवास स्थान को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इससे संबंधित व्यक्ति, परिवार या राष्ट्र को सीधा प्रभाव पड़ता है.
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