देश में समाजवाद के नाम पर बने सभी कानूनों को खत्म किया जा चुका है, पर चुनाव जीतने के लिए देश में गरीबोन्मुख योजनाएं पर इतना पैसा खर्च हो रहा है जितना कभी इंदिरा और नेहरू के दौर में भी नहीं हुआ. मतलब समाजवाद शब्द से केवल परहेज है, नीतियों से नहीं. यानी शराब वही है बस बोतल बदल दी गई है.
Originally published at आज तक

