इमाम हूसैन ने अपने परिवार सहित 72 साथियों के साथ कर्बला के मैदान में शहादत दी थी. इसके लिए हर साल मुहर्रम में उनको याद कर मजलिसों (शोक सभाओं) का आयोजन होता है. शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा कि रातभर चलने वाले नौहा ख्वानी और मजलिसों (शोक सभाओं) को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की जाए.
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