CJI ने आगे कहा, "पिछले 69 वर्षों में हमारे कानून में विस्तार हुआ है. जब आप समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हैं तो आप यह भी महसूस करते हैं कि ये एक बार के रिश्ते नहीं हैं, ये स्थिर रिश्ते भी हैं. ये न केवल शारीरिक बल्कि भावनात्मक भी हैं."
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