जवानी के दिनों में राजेंद्र असम से दिल्ली आ गए थे. यहां आकर उनकी मानसिक स्थित बिगड़ गई. इसके बाद से राजेंद्र दिल्ली की सड़कों पर लावारिश भटकते रहे. कुछ समय पहले अपना घर आश्रम ने उन्हें रेस्क्यू किया और उनका इलाज कराया. फिर पुलिसकर्मी की मदद से उनके परिवार का पता लगाया और फिर उन्हें वापस घर भेजा.
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